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लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के कारण खुद आईसीयू में थत्यूड का सीएससी अस्पताल

सरकार की अनदेखी व स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता के कारण दम तोड रहा अस्पताल

टिहरी गढ़वाल: सरकार भले ही आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने  के लाख दावें करें ! लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बंया करती है। राजधानी से मात्र 65 किमी की दूरी पर स्थित धनोल्टी विधान सभा क्षेत्र के जौनपूर विकास खंड मुख्यालय थत्यूड में सीएससी की बदहाली सरकार के  स्वास्थ्य सेवाओं को आईना दिखा रहा है। सरकार की अनदेखी व स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता के कारण यह सामुदायिक अस्पताल दम तोडता दिख रहा है।

दरअसल  करोडों की लागत से बने जौनपूर विकासखंड थत्यूड के एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र  पर जौनपूर विकासखंड के तकरीबन 80 ग्राम पंचायतों के 38000 हजार लोगो के बेहतर स्वास्थ्य उपचार की जिम्मेदारी है। और इसी आंकलन से इस अस्पताल का शुभारम्भ विकासखंड मुख्यालय में पीएसी से तब्दील कर सीएससी के रूप में किया गया था। लेकिन स्थिति यह है कि वर्तमान में विभाग की लचर व्यवस्थाओं के कारण आज अस्पताल ही खुद आईसीयू में है।

आपको बता दें कि कहने को तो इस अस्पताल में 11 पद चिकित्सकों के पद स्वीकृत है। लेकिन धरातलीय सच्चाई यह है कि यह अस्पातल मात्र 1 या दो डाक्टरों की रहमगुजारी के नाम पर मात्र खडा है। इसके साथ ही लैब है तो टैक्नीशियन नही है, वर्षो से टेक्नीशियन के पद खाली पडे है। मशीनों पर जंग लग चुका है और  इनको देखने वाले कोई नही है। किसी भी प्रकार के जाॅच की सुविधा आज तक यहाॅ पर उपल्बध नही हो पाई है। जिस कारण 80 ग्राम पंचायतों के लोगो को हर छोटी बडी बीमारी या किसी भी दुर्घटना के समय सीधे देहरादून स्वास्थ्य उपचार के लिये दौड़ना पडता है। वहीं प्राईवेट अस्पतालों में लोग अपनी गाॅढी कमाई को लुटाते आ रहे है।

स्थानीय लोगों की माने तो थत्यूड सीएससी की अव्यवस्थाओं के कारण जहाॅ गरीब लोगो को स्वास्थ्य लाभ के लिये देहरादून का रास्ता नापना पडता है, वहीं महिला चिकित्सक ना होने व किसी प्रकार की जांच की सुविधा न होने के कारण प्रसव के दौरान महिलाओं को भारी परेशनियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल  सीएससी ले जाते ही मरीजों को वहाॅ से रैफर कर दिया जाता है । कहने को तों यहाँ पर 8 डाॅक्टर्स कार्यरत है, लेकिन आज तक किसी ने भी इन आठ चिकित्सकों को अस्पताल में देखा तक नही है। आज आलम यह है कि अब अधिकाॅश लोग सीएससी में जाना भी पंसद नही करते है। लेकिन सरकार है कि सुनने को तैयार ही नही है। वहीं स्थानीय लोगो की माने तो सीएससी में कुछ ऐसे डाॅक्टरों की भी नियुक्ति होने की बात सामने आती है जिनकी शक्ल तक लोगो ने अस्पताल में देखी ही नही है और नियुक्ति के नाम पर सरकारी खजाने की लूट हो रही है।

वही क्षेत्रीय निवासी और ब्लाक प्रमुख कौंर सिह पंवार. पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख महिपाल सिह रावत.रणवीर सिह नेगी. सोम्बारी लाल नौटियाल.नवीन पंवार.फरशराम कोठियाल. जगत सिह असवाल. सुरेन्द्र सिह रावत. सोबत सिह रावत आदि लोगेा का कहना है कि पूर्व में अस्पताल पीपीपी मोड में था, लेकिन सुचारू संचालन ना होने के कारण जनता की माॅग पर इसे सीएससी में इस वजह तब्दील किया गया था। ताकि आम जनता को इसका फायदा मिल सके, लेकिन इसके बाद अस्पताल की स्थिति और भी बद से बदत्तर हो चुकी है। अस्पताल में चिकित्सकों का अभाव लगातार बना हुआ है, वहीं किसी भी प्रकार की जाॅच की सुविधा ना होने के कारण लोगों को देहरादून जाकर प्राईवेट डाक्टरों से अपनी जेब कटवानी पड रही है। सरकार की अनदेखी के खिलाफ स्थानीय लोगो में भारी आक्रोश व्याप्त है।

रिकॉर्ड  के मुताबिक अस्पताल में पदों की स्थिति….. 
पदनाम             पद         कार्यरत                    रिक्त
चिकित्सक        11             8                          3
फार्मसिस्ट        0 2             2                          0
लैब टैक्निशियन 01             0                          1
एक्सरे टेक्निशियन 01         0                          1
नेत्र सहायक      01            01                         0
वरिष्ठ सहायक   01            01                         0
कनिष्ठ सहायक  01            01                         0
वाहन चालक     01            0                         01
सफाई सेवक     02            0                          02
ए एन एम         29            09                        20

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