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प्रदेशभर में थमे 108 एंबुलेंस सेवा और खुशियों की सवारी के पहिये, मरीज रहे परेशान

एंबुलेंस न मिलने से नवजात शिशु ने ठिठुरन भरी रात में तोडा दम

Story Highlights
  • अक्तूबर और नवंबर माह का वेतन और छह माह से भत्ते समेत अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं कर्मचारी
  • मंगलवार रात हायर सेंटर के लिए रेफर की गई गर्भवती महिला का एम्बुलेंस न मिलने के कारण सड़क पर हुआ प्रसव
  • नवजात शिशु ने तोडा दम
  • 108 आपातकालीन सेवा की 139 एंबुलेंस और 95 खुशियों की सवारी का संचालन पूरी तरह रहा ठप
  • प्रदेशभर में सिर्फ 22 एम्बुलेंस हुई संचालित

देहरादून:   बुधवार को प्रदेशभर में  प्रबंधन और फील्ड कर्मचारियों के बीच तकरार के कारण 108 एंबुलेंस सेवा और खुशियों की सवारी के पहिये पूरी तरह थमे रहे।  जिसके कारण एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवा 108 का संचालन ठप होने से मरीजों और गर्भवतियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बुधवार को प्रदेशभर में 108 आपातकालीन सेवा की 139 एंबुलेंस और 95 खुशियों की सवारी का संचालन पूरी तरह ठप रहा। 717 फील्ड कर्मियों ने प्रबंधन पर उत्पीड़नात्मक रवैया अपनाने और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान न करने का आरोप लगाते हुए सामूहिक कार्य बहिष्कार किया। कर्मचारी संगठन के प्रदेश सचिव विपिन जमलोकी ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रबंधन से वार्ता का प्रयास किया लेकिन उनकी एक नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की मनमानी का जवाब दिया जाएगा। दिनभर एंबुलेंस अस्पतालों में ही खड़ी रही। लोग निजी वाहनों से मरीजों और घायलों को अस्पताल लेकर पहुंचे। ये हालात प्रदेश के तमाम जिलों में बने रहे।  108 सेवा न मिलने से रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

फील्ड कर्मियों की हड़ताल के कारण प्रदेशभर में सिर्फ 22 एंबुलेंस ही संचालित की जा सकी। जबकि खुशियों की सवारी के मात्र 13 वाहन ही संचालित हो पाए हैं। हालांकि कर्मियों की हड़ताल के बाद 108 का संचालन करने वाली कंपनी जीवीके ईएमआरआइ ने कर्मचारियों को नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही काम पर न लौटने पर बर्खास्त करने की चेतावनी दी है। हड़ताल के इस बीच कंपनी ने पायलट (ड्राइवर) समेत अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति भी जारी कर दी है।

बता दें राजधानी में मंगलवार रात हायर सेंटर के लिए रेफर की गई एक गर्भवती महिला का सड़क पर ही प्रसव हो गया। एंबुलेंस न मिलने के कारण ऑटो से जा रही महिला के नवजात शिशु ने ठिठुरन भरी रात में कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। बुधवार को परिजनों ने नवजात का अंतिम संस्कार भी कर दिया। लेकिन इस पूरी घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है।

दरअसल, 108 सेवा और केकेएस फील्ड कर्मचारी संघ ने अक्तूबर और नवंबर माह का वेतन और छह माह से भत्ते समेत अन्य मांगों को लेकर दो जनवरी से प्रदेशभर में हड़ताल की चेतावनी दी थी। बीते सोमवार कंपनी ने दोनों माह का वेतन और विभिन्न भत्तों के भुगतान कर दिया था।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दो माह का वेतन तो मिल गया, लेकिन भत्ते अभी तक नहीं मिले। प्रदेश अध्यक्ष नीरज कुमार शर्मा और प्रदेश सचिव विपिन चंद्र जमलोकी का कहना है पूर्व में कर्मचारियों ने अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन किया था। कंपनी को इसकी पूर्व में सूचना भी दी गई थी। लेकिन कर्मचारियों का वेतन काट लिया गया। वहीं, अभी अन्य कई मांग भी पूरी नहीं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अवकाश के दिन ड्यूटी करता है तो श्रम कानून के तहत उसे ओवरटाइम का दोगुना भुगतान किया जाए। हर माह पांच तारीख तक वेतन व बिलों का भुगतान, मूल वेतन का निर्धारण श्रम कानून के तहत करने, किसी भी कर्मचारी का अनावश्यक स्थानांतरण न करने, अगस्त माह में काटे गए दो दिन के वेतन का अविलम्ब भुगतान और कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण के लिए कमेटी के गठन की मांग भी उन्होंने की।

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