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श्रमिक-विरोधी नीतियों के विरोध में देश भर के 20 करोड़ कर्मचारी दो दिनी हड़ताल पर

10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनो के हड़ताल से जनजीवन प्रभावित

Story Highlights
  • देशभर के करीब 20 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर
  • 10 श्रमिक संगठनों का हल्ला बोल
  • श्रमिक संघों का ट्रेड यूनियन अधिनियम-1926 में प्रस्तावित संशोधनों का है विरोध
  • फिर से बैंकों में भी हड़ताल
  • वेतन बढ़ोतरी समेत श्रमिक संगठनों की 12 सूत्रीय मांगें
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के एक तरफा श्रम सुधार और श्रमिक-विरोधी नीतियों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संघोंके 20 करोड़ कर्मचारी मंगलवार यानी आज से 2 दिन की देशव्यापी हड़ताल पर हैं. देश भर के 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियन देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वेतन बढ़ोतरी समेत श्रमिक संगठनों की 12 सूत्रीय मांगें हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, टेलीकॉम, कोल, स्टील, बैंकिंग, इंश्योरेंस और ट्रांसपोर्ट सेक्टर इस हड़ताल में शामिल है. जिसकी वजह से जनजीवन प्रभावित है. 
 
इस हड़ताल में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हो रहे हैं. बैंक कर्मचारी यूनियन, श्रमिक संगठनों के 8 और 9 जनवरी को हड़ताल के चलते लोगों को बैंक संबंधी कामों को लेकर कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. संघों ने जारी संयुक्त बयान में इसकी जानकारी दी कि करीब 20 करोड़ कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल होंगे. एटक की महासचिव अमरजीत कौर ने सोमवार को 10 केंद्रीय श्रमिक संघों की एक प्रेस वार्ता में पत्रकारों से कहा, दो दिन की हड़ताल के लिए 10 केंद्रीय श्रमिक संघों ने हाथ मिलाया है. हमें इसमें 20 करोड़ श्रमिकों के शामिल होने की उम्मीद है. 
 
उन्होंने कहा कि बीजेपीनीत सरकार की जनविरोधी और श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ इस हड़ताल में सबसे ज्यादा संख्या में संगठित और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी शामिल होंगे. दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कोयला, इस्पात, बिजली, बैंकिंग, बीमा और परिवहन क्षेत्र के लोगों के इस हड़ताल में शामिल होने की उम्मीद है. कौर ने कहा, हम बुधवार को नई दिल्ली में मंडी हाउस से संसद भवन तक विरोध जुलूस निकालेंगे. इसी तरह के अन्य अभियान देशभर में चलाए जाएंगे. 
 
कौर ने कहा कि केंद्रीय श्रमिक संघ एकतरफा श्रम सुधारों का भी विरोध करता है. उन्होंने कहा, हमने सरकार को श्रमिक कानूनों के लिए सुझाव दिए थे, लेकिन चर्चा के दौरान श्रमिक संघों के सुझाव को दरकिनार कर दिया गया. हमने 2 सितंबर 2016 को हड़ताल की. हमने 9 से 11 नवंबर 2017 को ‘महापड़ाव’ भी डाला, लेकिन सरकार बात करने के लिए आगे नहीं आई और एकतरफा श्रम सुधार की ओर आगे बढ़ गई. 
 
कौर ने कहा कि सरकार रोजगार पैदा करने में नाकाम रही है. सरकार ने श्रमिक संगठनों के 12 सूत्रीय मांगों को भी नहीं माना. श्रम मामलों पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में बने मंत्रीसमूह ने 2 सितंबर की हड़ताल के बाद श्रमिक संगठनों को चर्चा के लिए नहीं बुलाया. इसके चलते हमारे पास हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. श्रमिक संघों ने ट्रेड यूनियन अधिनियम-1926 में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध किया है. सरकारी बैंकों के कुछ कर्मचारी 8 और 9 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेंगे. उन्होंने सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर प्रस्तावित हड़ताल के समर्थन में यह निर्णय लिया है. आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने बंबई शेयर बाजार को बताया है कि ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) ने 8 और 9 जनवरी के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बारे में इंडियन बैंक एसोसिएशन को सूचित किया है.
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