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श्रमिक संगठनों के हड़ताल से मसूरी में जनजीवन रहा प्रभावित, श्रमिकों में दिखा भारी आक्रोश

आम चुनावों में भाजपा के प्रचारकों को प्रचार के लिए मसूरी में नही घुसने दिया जाएगा: श्रमिक संगठन

Story Highlights
  • 20 हजार रूपये न्यूनतम वेतन मार्च तक घोषित करे सरकार
  • श्रमिक संगठनों की मुख्य मांगें-
  • पूंजीपतियों के इशारे पर काम करना बंद करे सरकार
  • श्रम कानूनों के साथ एक तरफ़ा छेड़छाड़ बंद करे सरकार
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए सख्ती से श्रम कानूनों का हो पालन

मसूरी। श्रमिक संघों के देशव्यापी हड़ताल के तहत बैंक, डाक विभाग सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की हड़ताल के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। मसूरी ट्रेड यूनियन समन्वय समिति के नेतृत्व में विभिन्न श्रमिक संगठनों ने शहर में प्रदर्शन केंद्र की मोदी सरकार व राज्य की त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। इससे पहले सुबह जिन होटलों व प्रतिष्ठानों में कर्मचारी रैली में नहीं पहुंचे वहां श्रमिक टुकड़ियों ने पहुंचकर प्रदर्शन किया और श्रमिको को हड़ताल में शामिल किया। इस दौरान श्रमिक संगठनों ने एक बार फिर मोदी सरकार को चेताया है कि यदि मार्च तक न्यूनतम वेतन लागू करने सहित अन्य मांगों पर सरकार ने विचार नही किया तो आगामी आम चुनावों में भाजपा के प्रचारकों को प्रचार के लिए मसूरी में नही घुसने दिया जाएगा । 

बुधवार को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल के तहत केंद्र की मोदी सरकार व राज्य की त्रिवेंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों व एकतरफा श्रम कानूनों में संसोधन किये जाने के खिलाफ श्रमिको में भारी आक्रोश दिखाई दिया,  जिसका मसूरी में खासा प्रभाव रहा। ट्रेड यूनियन समन्वय समिति के नेतृत्व में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों होटल वर्कस यूनियन, होटल एवं रेस्टोरेंट कर्मचारी संघ, मजदूर संघ, दुकान कर्मचारी संघ, स्कूल कर्मचारी संघ, भवन निर्माण संघ, गाइड यूनियन आदि ने शहर में रैली निकाल प्रदर्शन किया व जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल के दौरान जहाँ बैंक बंद रहे, वहीं डाकघर में भी कोई कार्य नहीं हुआ। वहीं ट्रेड यूनियनों के रैली के कारण मॉल रोड पर जगह-जगह जाम लगा रहा। काफी देर तकजाम में फंसे रहने के कारण पर्यटकों व स्थानीय लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। 

इस मौके पर एटक नेता व ट्रेड यूनियन समन्वय समिति के अध्यक्ष आरपी बडोनी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार लगातार श्रमिक विरोधी नीति अपनाती रही है, जिसका खामियाजा सरकार को आगामी आम चुनाव में उठाना पडे़गा। उन्होंने कहा कि विगत कई वर्ष से श्रमिक न्यूनतम वेतन 20 हजार की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जबकि मंहगाई लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पूंजीपतियों के इशारों पर कार्य कर रही है तथा श्रम कानूनों  में एकतरफा छेड़छाड़ कर रही है, जिसके नतीजतन असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का शोषण हो रहा है और श्रम कानूनों का उलंघन किया जा रहा है।

इस मौके पर सीटू नेता व होटल रेस्टोरेंट कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सोबन सिंह पंवार ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद से आज तक लगातार मजदूरों को शोषण कर रही है, साथ ही बडे़ उद्योगपतियों के साथ मिलकर श्रमिक विरोधी काम कर श्रम कानूनों में बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि आज भी असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों के लिए कोई नियम कानून नहीं है तथा जो सुविधायें उन्हें मिलनी चाहिए, वह भी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि यदि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का न्यूनतम वेतन मार्च तक लागू नही हुआ और श्रमिकों का उत्पीडन बंद नहीं किया गया तो आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा के प्रचारकों का पुरजोर विरोध किया जाएगा और उनको मसूरी में प्रचार नही करने दिया जाएगा।

इससे पहले रैली लाईब्रेरी चौक पहुंचकर सभा में तब्दील हुई, जहाँ मजदूर नेता व सीपीआई के शहर सचिव देवी गोदियाल, दून स्कूल कर्मचारी पंचायत के अध्यक्ष बैसाख सिंह, भवन निर्माण संघ के अध्यक्ष सलीम अहमद, सचिव सुनील कुमार, होटल वर्कर्स यूनियन के महासचिव पूरण नेगी, होटल रेस्टोरेंट कर्मचारी संघ के महासचिव विक्रम बलूडी सहित अन्य मजदूर नेताओं ने सभा को संबोधित किया व राज्य की त्रिवेंद्र सरकार व मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। 

इस मौके पर पालिका सभासद दर्शन रावत, भवन निर्माण संघ के पूर्व अध्यक्ष असलम खान, गाइड यूनियन के अध्यक्ष त्रेपन सिंह, मजदूर संघ के सचिव गंभीर सिंह पंवार, वीरेद्र रावत, मुलायम सिंह रावत, विजय कंडारी, विजय बिंद्वाल, सोबत सिंह, हुकम सिंह राणा, अरविंद जोशी, राजेश शर्मा, मुकेश राव, प्रेम खंडूरी सहित बड़ी संख्या में श्रमिक संगठनों के नेता व विभिन्न प्रतिष्ठानों के कर्मचारी मौजूद रहे।

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