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अग्रिम आदेशों तक नही होंगी कर निर्धारण समिति की आगामी बैठके: पालिकाध्यक्ष

निराश होकर लौटे भवन करदाता, पालिकाध्यक्ष ने किया खेद व्यक्त, विवाद की निंदा की, कहा- आगे पारदर्शिता के साथ सबके सामने होगा कर निर्धारण

Story Highlights
  • जनता को झेलनी पड़ रही है विवाद के कारण परेशानी
  • पार्टी को होटल में बुलाया जा रहा है कि इसमें क्या करना है, इसमें तो लाखों का टैक्स बनता है, मै इसे भ्रष्टाचार ही मानती हूँ: गीता
  • जिन चार फाइलों को लेकर वे समिति के सामने लेकर आई थी, उन्हें वे जानते तक नहीं, ऐसी राजनीती नही पसंद: पंवार
  • ऐसे हालतों में उनका मन करता है कि सभासद पद से इस्तीफा दे दू: थपलियाल

मसूरी: नगर पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कर निर्धारण समिति के अध्यक्ष और सदस्यों में उपजे विवाद को देखते हुए समिति की आगामी सभी बैठकें अग्रिम आदेश तक रद्द कर दी हैं. वहीं आज भी समिति की बैठक थी, किन्तु समिति में उपजे विवाद के कारण कर दाताओं को भी निराश होकर लौटना पड़ा. इस दौरान समिति के अध्यक्ष प्रताप पंवार और सदस्या गीता कुमाई ने मीडिया के समक्ष अपना अपना पक्ष रखा, व एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए.

शनिवार को एक बार फिर कर निर्धारण समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसके लिए अपने भवन कर के निस्तारण के लिए सम्बंधित कर दाता बड़ी संख्या में उपस्थित थे, लेकिन उनकी उम्मीदों पर तब पानी फिर गया, जब  समिति की बैठक में समिति के सदस्य आपस में उलझे रहे. दरअसल अब कर दाताओं को मामलों के निस्तारण के लिए अभी और इन्तजार करना पड़ेगा, क्योंकि विवाद के चलते पालिकाध्यक्ष द्वारा आगामी बैठकों पर भी अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गयी है.

बता दें आज भी समिति के अध्यक्ष प्रताप पंवार और सदस्या गीता कुमाई के बीच विवाद के कारण बैठक तो नही हो पायी, लेकिन मीडिया की उपस्थिति में दोनों एक दूसरे से उलझे रहे. गीता कुमाई ने प्रोसीडिंग में छेड़छाड़ करने  का आरोप लगाने के साथ ही एक काल रिकॉर्डिंग को मीडिया के सामने प्रस्तुत किया. तो अध्यक्ष प्रताप पंवार ने उन फाइलों को दिखाया, जिनको लेकर उन्होंने गीता कुमाई पर दबाव बनाने और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने का बयान दिया था. इस तरह दोनों ही अपने अपने आरोपों पर अडिग रहे.

गीता कुमाई द्वारा सुनाई गयी काल रिकॉर्डिंग में किसी प्रकार के लेनदेन जैसी बात सामने नही आई, लेकिन उनका कहना था कि फ़ोन पर जो बातचीत हो रही है, उससे समिति के अध्यक्ष की मंशा साफ़ होती है. वहीं प्रताप पंवार का कहना था कि जो रिकॉर्डिंग पेश की जा रही है, वह गलत है, उसमे ये साबित नही होता कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार किया है, या किसी से कोई पैसे वसूल किये. उन्होंने कहा कि वे जिन चार फाइलों की बात कर रहे थे (जिनका गीता कुमाई निस्तारण करवाना चाहती थी), उनमे से रिकॉर्डिंग में किसकी आवाज है वे इसे स्पष्ट करें. हालांकि गीता कुमाई ने यह साफ़ नही किया कि आवाज किसकी है.

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए गीता कुमाई ने कहा कि जनता ने हमे ईमानदारी से काम करने के लिए पालिका में भेजा है, और हमे पुराने ढर्रे पर चलना छोड़ना होगा. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार यहाँ से शुरू होता है कि हम कमर्शियल फाइलों को निस्तारण कर नही रहे और आवासीय को रजिस्टर में चढ़ा रहे हैं, जबकि कमर्शियल फाइल के कॉर्नर में लिख रहे हैं और बाद में होटल में जाकर सम्बंधित से पूछा जा रहा है कि इसमें क्या करना है. पार्टी को होटल में बुलाया जा रहा है कि इसमें क्या करना है, इसमें तो लाखों का टैक्स बनता है. कुमाई ने कहा कि इससे मंशा साफ़ जाहिर होती है और वे इसे भ्रष्टाचार मानती है.

वहीं समिति के अध्यक्ष प्रताप पंवार का कहना है कि उन्होंने पहले भी कहा और अब भी कह रहे हैं कि यदि उनके खिलाफ कोई सबूत है तो  उसे सामने लायें, वे अभी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने आरोपों को नकारते हुए कहा कि गीता कुमाई अनर्गल आरोप लगाकर जिस व्यक्ति को टैक्स से कोई लेना नही है उसे बीच में ला रही हैं और किसी के साथ की व कहीं की बातें (काल रिकॉर्डिंग) को बीच में ला रही हैं, जबकि जिन चार फाइलों को लेकर वे समिति के सामने लेकर आई थी, उन्हें वे जानते तक नहीं. उन्होंने कहा कि वे काम करने आये हैं और काम करेंगे, इस तरह की छिछोरी राजनीती उन्हें पसंद नही है.

इस सम्बन्ध में पालिका टीआई गिरीश सेमवाल ने कहा कि कर निर्धारण से सम्बंधित लगभग  पुरानी 500 फाइलें समिति के सामने प्रस्तुत थी. नई समिति थी, काम समझ में नही आने और अनुभव की कमी के चलते संभवतः समिति के उपर काफी दबाव आ  था. जिस कारण हो सकता है समिति के अध्यक्ष ने बैठक की कार्यवाही शुरू कर दी हो और कोरम पूरा न होने पर बैठक स्थगित करते हुए क्रॉस कर दिया हो. लेकिन प्रोसीडिंग में जहा तक छेड़छाड़ की बात है, तो उसमे कोई छेड़छाड़ नही हुई है.

उधर इस विवाद के कारण जो सबसे अधिक दुखी दिखाई दिए, वे थे वार्ड 1 के सभासद व समिति के सदस्य सुरेश थपलियाल. उन्होंने दुखी मन से कहा कि ऐसे हालतों में उनका मन करता है कि सभासद पद से इस्तीफा दे दू. उनका कहना था कि उन्हें जनता ने काम के लिए भेजा है, लेकिन हम आपस में लड़ रहे हैं, जो ठीक नही है.

पूरे मामले पर पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि मामला उनके सज्ञान में आया है, लेकिन जो कुछ चल रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है और वे इसकी निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि पूरे विवाद को देखते हुए अग्रिम आदेश तक कर निर्धारण समिति की आगामी सभी बैठकें निरस्त की जाती हैं और आगे कर निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा. साथ ही कहा कि कर सम्बंधित सभी मामलों का निस्तारण सभी सभासदों व कर दाताओं के सामने पारदर्शिता के साथ किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से कर निर्धारण में भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे गलत हैं. उन्होंने कहा कि कर निर्धारण में यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसके पक्ष में सभासद ठोस सबूत पेश करे,ताकि वे कार्यवाही कर सके.  वहीं उन्होंने कहा कि सिर्फ राजनीती चमकाने के लिए विरोध की राजनीति नही होनी चाहिए और पूरा घटनाक्रम दुर्भाग्यपूर्ण है.

इस पूरे घटनाक्रम से नगर पालिका की नई बोर्ड पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है, तो  आम जनता पिसती नजर आ रही है. इस तरह विवाद उत्त्पन्न होने से जनता को ही सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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