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बर्फ़बारी से कई सम्पर्क मार्ग अब भी बंद, ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाली दूध, सब्जी की आपूर्ति बाधित

प्रशासन की अनदेखी के चलते ग्रामीणों को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना

मसूरी। सालों बाद मंगलवार को हुई भारी बर्फ़बारी(snowfall) से मसूरी (mussoorie) व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। बर्फ़बारी के बाद मार्ग बंद होने से ग्रामीण (villagers) राशन तक नहीं ला पा रहे हैं। प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के बंद मार्गों की अनदेखी करने के गांवों के लोगो को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बर्फ़बारी (snowfall) को हुए तीन दिन बीतने के बाद भी कई गाँवों का एक दूसरे से सम्पर्क टूट गया हैं, मार्ग बंद होने के चलते ग्रामीणों (villagers) को राशन आदि के लिए परेशानी हो रही है, लेकिन प्रशासन ने अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया। हालाँकि शहरी क्षेत्र में  प्रशासन ने बुरांसखंडा तक सडक खोल दी है।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भरत सिंह चौहान का कहना है कि रोड बंद होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है, एक ओर जहाँ घरों में राशन भी समाप्त हो रहा है, तो  दूसरी ओर लोगों को रात अंधेरे में काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र ग्रामीण क्षेत्रों के सडकें भी खोली जाय, ताकि ग्रामीण रोज मर्रा की वस्तुएं के लिए आवाजाही कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि सबसे अधिक परेशानी शादी ब्याह वालों को हो रही है, रोड बंद है बारात आनी-जानी है, तो बाहर से आने वाले मेहमानो को बर्फबारी के कारण कई मील पैदल चलकर आने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि थत्यूड क्षेत्र के करीब ढाई सौ गांव बर्फबारी से प्रभावित हुए हैं।

प. अजय उनियाल का कहना है कि तीन दिन बीतने पर भी मसूरी टिहरी मार्ग, मसूरी-थत्यूड़ मार्ग,  भवान-उत्तरकाशी मार्ग नहीं खोला जा सका है, जिसके कारण आने जाने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर किसी को टिहरी, उत्तरकाशी या उससे आगे जाना है, तो उसे वाया देहरादून ऋषिकेश से चंबा होकर जाना पड़ रहा है , जिस कारण समय व धन की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर रोड बंद होने से जौनपुर के थत्यूड क्षेत्र से मसूरी आने वाले दूध व सब्जी की आपूर्ति भी बाधित हो गई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है, कि शीघ्र बंद मार्ग खुलवाये जाय, ताकि  ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब पहले से ही पता था कि भारी बर्फबारी हो सकती है, तो प्रशासन को उसी हिसाब से मुस्तैद होना चाहिए था।

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