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हंगामेदार रहेगा आखिरी बजट सत्र, सत्ता पक्ष व विपक्ष ने कसी कमर

बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा

नई दिल्ली: शुक्रवार को मोदी सरकार अपना अंतरिम बजट पेश करने जा रही है और आज से राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ बजट सत्र का आगाज हो गया है. बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा, जिसमें कुल 10 बैठकें होंगी. हालांकि, लोकसभा चुनाव में पहले होने वाली इस सत्र में भी पिछले संसद सत्रों की तरह हंगामे के आसार हैं. चुनाव में पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के ही अपने-अपने मुद्दे हैं, जिन पर संसद के भीतर हंगामा देखने को मिल सकता है.

इस अंतरिम बजट में सरकार लोकलुभावन घोषणाएं कर सकती है तो दूसरी ओर विपक्ष राफेल डील, सांख्यिकी विभाग के अधिकारियों के इस्तीफे, किसानों से जुड़े मुद्दों को सदन के भीतर उठाने की कोशिश करेगी. उधर, मोदी सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस आखिरी सत्र में भी तीन तलाक और नागरिकता संशोधन जैसे अहम विधेयक को पारित कराने की कोशिश की जाएगी. यह दोनों ही विधेयक मॉनसूत्र सत्र में लंबित रह गए थे.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रहे हैं. इसके बाद शुक्रवार को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी देख रहे पीयूष गोयल अंतरिम बजट पेश करेंगे. रेल मंत्री गोयल को कुछ दिन पहले ही वित्त मंत्रालय का प्रभार दिया गया है. अरुण जेटली अस्वस्थ होने की वजह से अमेरिका में इलाज करा रहे हैं और यही वजह है कि इस बार का बजट पीयूष गोयल पेश करेंगे. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं का ऐलान कर सकती है.

नागरिकता संशोधन विधेयक पर तो मोदी सरकार के सहयोगी दल जेडीयू ने तक आंखें दिखा दी हैं, जिसके बाद से सदन में इस बिल की राह और भी मुश्किल हो गई है. दूसरी ओर, पूर्वोत्तर में असम गण परिषद ने बिल के विरोध में एनडीए का साथ छोड़ दिया है. इस बिल को लेकर पूर्वोत्तर में सरकार के सहयोगी दल भी नाराज हैं जिसका खामियाजा बीजेपी को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है.

मोदी सरकार के एजेंडे में जन प्रतिनिधित्व संशोधन अधिनियम 2017 है जिसमें प्रॉक्सी के जरिये NRIs को वोटिंग का अधिकार देने की बात कही गई है. इसके साथ ही राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल विधेयक भी सरकार के एजेंडे में शामिल है. इनमें से कुछ महत्वपूर्ण लोकसभा से पारित हो चुके हैं जबकि बहुमत न होने की वजह से एनडीए सरकार को राज्यसभा में इनके पारित होने का इंतजार है.

सत्र के दौरान सरकार की ओर से अयोध्या में गैर विवादित 67 एकड़ जमीन को उसके मालिकों को लौटाने के संबंधी याचिका पर भी हंगामे हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार की इस अर्जी पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया है. अयोध्या जमीन विवाद कोर्ट में लंबित होने की वजह से सरकार ने मंदिर निर्माण के लिए नए रास्ते की तलाश की है.

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