Select your Language: हिन्दी
UNCATEGORIZED

शहीद सिद्धार्थ नेगी के घर पहुंची रक्षामंत्री, श्रद्धांजली दी, शहीद के पिता ने की जनता से ये अपील….

शहीद के पिता बोले- मौत तो आनी ही है कहीं भी आ सकती है, पर गर्व है कि बेटा देश पर मर मिटा

देहरादून: बेंगलुरु में विमान दुर्घटना में शहीद देहरादून के पंडितवाड़ी निवासी स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ नेगी की अस्थियां सोमवार को हरिद्वार के कनखल स्थित सती घाट पर विसर्जित की गईं. सिद्धार्थ के पिता ने नम आंखों से अपने बेटे की अस्थियों को गंगा में विसर्जित किया. इस दौरान घाट पर मौजूद लोग अपने लाल को याद कर रो पड़े.  आज उनके परिवार से मिलने स्वयं रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण दून पहुंची। उन्होंने पंडितवाड़ी स्थित शहीद के घर जाकर शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। वह यहां करीब एक घंटे रहीं। फिर विशेष चॉपर से वापस लौट गईं।

बता दें, एक फरवरी को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का मिराज-2000 ट्रेनर विमान ने उड़ान भरी और कुछ ही देर बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में दून निवासी स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ नेगी व गाजियाबाद निवासी स्क्वाड्रन लीडर समीर अबरोल शहीद हो गए थे। मंगलवार सुबह शहीद सिद्धार्थ नेगी के परिवार से मिलने पहुंची रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शहीद के पिता बलबीर सिंह नेगी, मां सुचित्रा व पत्नी ध्रुविका को ढांढस बंधाया। इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है। रक्षा मंत्री ने शहीद को श्रद्धांजली दी व परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।


इस दौरान शहीद के पिता बलवीर सिंह नेगी की आंखों में अपने जवान बेटे को खोने का गम साफ देखा झलक रहा था, इसके बावजूद उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है. सिद्धार्थ के पिता बलबीर सिंह नेगी ने कहा कि उनके बेटे ने अपनी ड्यूटी निभाई है। उन्हें गर्व है कि उनके बेटे ने खुद की जान देकर कई लोगों की जान बचाई है। बोले, मौत तो आनी ही है कहीं भी आ सकती है, पर गर्व है कि बेटा देश पर मर मिटा। उन्होंने कहा खतरा हर जगह होता है, अगर हर कोई अपने बच्चों को सेना में भर्ती होने से रोकेगा तो इस मातृभूमि की रक्षा के लिए कौन आगे आएगा। इसलिए लोग अपने बच्चों को सेना में भेजें।

हादसे की जांच के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी मामले की स्वत: जांच होती है और जांच चल भी रही है। पर जब भी हम कोई जॉब करते हैं तो हमें उसके विषय में पूरा पता रहता है कि इसमें क्या खतरे हैं क्या नहीं। हम इन खतरों के लिए हमेशा तैयार भी रहते हैं। इसलिए किसी पर कोई आक्षेप या किसी तरह की शिकायत का सवाल ही नहीं उठता। हमें भारतीय वायुसेना और सभी की तरफ से पूरा सहयोग मिला है।

बता दें, जिस दिन यह हादसा हुआ उसी दिन सिद्धार्थ का जन्मदिन भी था। सुबह 6.08 पर पिता ने उनसे बात की थी। उन्हें जन्मदिन की बधाई और आशीर्वाद दिया। करीब 10.30 पर यह हादसा हो गया। मां सुत्रिता को इस बात का मलाल है कि वह बेटे से आखिरी बार बात भी नहीं कर सकीं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button