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दून अस्पताल में नौकरी के नाम पर तीन युवतियों से फर्जीवाड़ा, आरोपी महिला की तलाश जारी

अस्पताल में लंबे समय से घूमती रहती है आरोपी युवती

देहरादून: राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के अधीन दून अस्पताल प्रशासन के उस समय हाथ पैर फूल गए, जब सोमवार को अस्पताल में  नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़े का एक मामला सामने आया। खुद को नर्स बताने वाली एक महिला ने अस्पताल में नौकरी देने के एवज में तीन युवतियों से हजारों रुपये वसूल लिए। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षाकर्मियों को महिला के अस्पताल में दिखने पर तुरंत पुलिस को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक़ खुद को नर्स बताने वाली एक महिला ने महिला ने तीनों युवतियों को फर्जी आईकार्ड और नियुक्त पत्र भी थमा दिए। सोमवार को तीनों ज्वाइन करने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. केके टम्टा के पास पहुंचे तो इसका खुलासा हुआ। तीनों ने अपना परिचय पत्र और नियुक्ति पत्र दिखाते हुए उन्हें अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन कराने की बात कही। चिकित्सा अधीक्षक ने उनका परिचय पत्र और नियुक्ति पत्र देखा तो वह फर्जी निकला। चिकित्सा अधीक्षक ने जब तीनों को फर्जीवाड़े की बात बताई तो उनके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई। तीनों ने इसकी शिकायत चिकित्सा अधीक्षक और पुलिस में की है। अस्पताल में नौकरी के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र और आईकार्ड देकर तीन युवतियों से पैसे ऐंठने वाली महिला का अभी तक कुछ पता नही चल पाया है।

इस पूरे प्रकरण में अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। माना जा रहा है कि उनके संरक्षण में ही महिला ने अस्पताल के फर्जी नियुक्ति पत्र और आईकार्ड तैयार किए। महिला की कुछ चिकित्सकों से भी नजदीकी बताई जा रही है, जिसका उसने फर्जीवाडा करने में फायदा उठाया।

बताया जा रहा है कि जिस महिला का नाम फर्जीवाडे में शामिल बताया गया, वह लंबे समय से अस्पताल में घूमती रहती है और अक्सर एप्रिन पहनकर वह चिकित्सकों के कक्ष और नर्सों के साथ घूमती दिखती थी। हालांकि मंगलवार पूरे दिन वह युवती अस्पताल में नजर नहीं आई। बताया जा रहा है कि वह महिला इन दिनों ज्यादातर समय प्लास्टर रूम में बैठी रहती है। अस्पताल के एक फार्मेसिस्ट से उसके नजदीकी को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं।

कुछ समय पहले एक पूर्व सीएमओ का नाम भी नियुक्ति के नाम पर पैसे मांगने के मामले में उछला था। हालांकि बाद में उनकी कोई भूमिका नहीं मिली थी। तब भी इसी महिला की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। बताया गया कि सीएमओ के नाम पर इसी महिला ने लोगों से पैसे लिए थे।

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