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हे नाथ …..कब बदलेंगे अस्पताल के हालात

  • हे नाथ कब बदलेंगे अस्पताल के हालात
    इलाज न मिलने से एक ओर मौत

बकस्वाहा ब्लॉक अंतर्गत 121 गांव के लिए बनाए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक डॉक्टर एल एल अहिरवार है जो आए दिन बाहर ही रहते हैं ऐसे में इलाज के अभाव में लोग अपनी जान गवा देते हैं ऐसा ही एक मामला आज सामने आया जब भाड़ाटोर निवासी कमल यादव उम्र 28 वर्ष बकस्वाहा किसी काम से आए और अचानक उनकी हालत बिगड़ गई मौके पर मौजूद लोगों ने कमल यादव को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने लगभग 10 मिनट बाद दम तोड़ दिया नही मिल सका प्रथामिक उपचार ,डॉक्टर ना होने की वजह से इलाज तो दूर की बात है मृत घोषित करने के लिए भी कोई डॉक्टर उपस्थित नहीं था ऐसे में परिजनों ने एक निजी गाड़ी कर बटियागढ़ 18 किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया और कहा कि अगर 40 मिनट पहले इन्हें प्राथमिक उपचार मिल जाता तो इनकी जान बचाई जा सकती पर सवाल सही होता है कि सरकार बदली सिस्टम बदला नहीं बदले अस्पताल के हालात आज भी इलाज के अभाव में लोग ग्रामीण दम तोड़ रहे हैं

समूचे विकास खंड के 121 गांव की तकरीबन एक लाख से अधिक आबादी के इलाज की जिम्मेदारी लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुविधाओं एवं डॉक्टर के अभाव में इलाज औपचारिकता भी तरीके से नहीं कर पाता। 2जून की रोटी को अथक मेहनत करने वाले ग्रामीण लोग जब इलाज की तलाश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं तो वहां इलाज तो बहुत दूर की बात बैठने को उचित स्थान और पीने को पानी भी नसीब नहीं होता।डॉक्टर के अभाव में पदस्थ स्टाफ भी खुद को वरिष्ठ अधिकारी से कम नहीं समझते। अस्पताल की शेष समस्त व्यवस्थाएं पूर्णतया ध्वस्त दिखाई देती हैं कहीं डिस्पोज दवाओं का कचरा कहीं बीड़ी गुटखा के पाउच ही नजर आते हैं इसके अलावा ओपीडी हो या प्रसूता कंपाउंड एनआरसी हो अथवा अस्पताल की गैलरी कुत्ते और जानवर आपको हर जगह देखने को मिलेंगे चाहे वो वार्ड हो या मरीजो के बेड हां यदि आपको ढूंढना ही पड़ेगा तो स्टॉप में पदस्थ लोगों को।

*नाम मात्र की सुविधाएं*

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने की वजह से सुविधाओं की खानापूर्ति कागजों में भले ही दर्शाई जाती हो परंतु वास्तविकता यह है कि यहां मौजूद एंबुलेंस आज तक किसी मरीज के उपयोग में आती नजर नहीं आई जननी एक्सप्रेस हो अथवा स्वास्थ्य विभाग का वाहन जरूरत के समय मरीजों को अपनी ही व्यवस्था से आना जाना पड़ता है एक्स रे और खून की जांच करवाने के लिए भी लोगो को जिला स्तर तक जाना पड़ता है।

*आएदिन होती मरीजो की मौत* ऐसी विषम परिस्थिति में आर्थिक अभाव के बाद भी मरीज को मजबूरन या बाहर जाना पड़ता है बकस्वाहा मुख्यालय से 50 किलोमीटर दमोह 100 किलोमीटर छतरपुर या सागर इलाज के लिये जाना पड़ता है कई बार तो यह भी होता है इलाज के अभाव में या उचित इलाज के लिए तय की गई दूरी ही मरीज की मौत का कारण बन जाती है।

मुख्यमंत्री बदले पर नही बदले तो बकस्वाहा अस्पताल के हालात बकस्वाहा ब्लॉक में महज एक डॉक्टर एल एल अहिरवार है उनके भरोसे अस्पताल का जिम्मा है जो बी एम ओ का प्रभार भी लिए है ऐसे में एक डॉक्टर के जिम्मे 121 गांव स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मिन्द भी करना बेईमानी होगी

बी एस बाजपेयी जिला चिकित्सा अधिकारी
ये बात सही है की इतने बड़े क्षेत्र के लिए सिर्फ एक डॉक्टर है लेकिन डॉक्टर तो ऊपर के अधिकारी भेजेगे मेरे अधिकार क्षेत्र की बात नही है

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