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रुक्मिणी -कृष्ण विवाह में नाचे श्रोता

दमोह-मड़ियादो कस्बे के धनुषधारी सरकार मंदिर में हो रहा आयोजन

यूसुफ पठान-मड़ियादौ(दमोह)
गांव के धनुषधारी सरकार मंदिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के छठवे दिन कथा व्यास पंडित श्री विवेक बिहारी वृंदावन धाम द्वारा कृष्ण और रुक्मणी के विवाह की लीला का विस्तार पूर्वक वर्णन कर मंचन का अयोजन किया गया। संगीतमयी भागवत कथा में जहां शनिवार को कृष्ण रुक्मणी की आकर्षक झांकी बनाई गई। जिनके दर्शन करने बड़ी संख्या में कई श्रद्धालु पहुंचे थे।कथा में पं.श्री महराज जी द्वारा बताया गया कि – महाराज भीष्म अपनी पुत्री रुक्मिणी का विवाह श्रीकृष्ण से करना चाहते थे, परन्तु उनका पुत्र रुक्मणी से राजी नहीं था। वह रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था। रुक्मिणी इसके लिए प्रसन्न नहीं थीं। विवाह की रस्म के अनुसार जब रुक्मिणी माता पूजन के लिए आईं तब श्रीकृष्णजी उन्हें अपने रथ में बिठा कर ले गए। तत्पश्चात रुक्मिणी का विवाह श्रीकृष्ण के साथ हुआ। ऐसी लीला भगवान के सिवाय दुनिया में कोई नहीं कर सकता। यह संगीतमय भागवत कथा शनिवार को गांव के धनुषधारी सरकार मंदिर में पंडित श्री विवेक बिहारी महाराज द्वारा भागवत कथा ऐसा शास्त्र है। जिसके प्रत्येक पद से रस की वर्षा होती है। इस शास्त्र को शुकदेव मुनि राजा परीक्षित को सुनाते हैं। राजा परीक्षित इसे सुनकर मरते नहीं बल्कि अमर हो जाते हैं। प्रभु की प्रत्येक लीला रास है। हमारे अंदर प्रति क्षण रास हो रहा है, सांस चल रही है तो रास भी चल रहा है, यही रास महारास है इसके द्वारा रस स्वरूप परमात्मा को नचाने के लिए एवं स्वयं नाचने के लिए प्रस्तुत करना पड़ेगा, उसके लिए परीक्षित होना पड़ेगा। जैसे गोपियां परीक्षित हो गईं। रुक्मणी कृष्ण विवाह में काफी संख्या में आए श्रद्धालु कथा सुनकर भक्तिरस में डूबे रहे। इस अवसर पर कृष्ण-रुक्मिणी विवाह को साकार करते हुए मनोहर झांकी सजाई गई, जिसमें श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का स्वयंवर मंच पर प्रस्तुत किया गया। संगीतमय भागवत कथा में संगीत मंडली द्वारा पूरे सहयोग से समस्त कार्यकर्ताओं के सहयोग से छठवें दिन रुक्मणी विवाह संपन्न हुआ वहीं भागवत कथा का आज समाापन किया जायेगा।

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