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नगड़िया की थाप पर नाचते है फगुयारे,फिर गाते है फ़ाग

बुंदेलखंड में विभिन्न परम्पराओं का आज भी है रिवाज़

यूसुफ पठान मड़ियादो(दमोह)

आज के इस भागदौड़ भरे जीवन मे लोग अपनी पुरानी परम्पराओं को  आज भी  जीवित किये हुए है। जिसमें होली एक मुख्य त्योहार है। गावों में आज भी होली के अवसर पर रंग,गुलाल के साथ पूरे मौज मस्ति के साथ फाग मनाई जाती है। गलियों, चौराहों पर नगड़िया की थाप पर फगुयारे नाचते, गाते फाग मनाते है।जैसा कि वर्सो से चला आ रहा है। 70 वर्षीय बुजुर्ग विश्राम कुशवाहा बताते है स्नातलकाल से फाग का त्यौहार मनाया जा रहा है। भगवान ने भी फाग खेली थी। साल में इस त्यौहार के बहाने एक दूसरे से मिलने का मौका मिल जाता है। और एक दूसरे पर रंग लगाकर गीले,शकवे दूर हो जाते है।

उन्होंने बताया परमा के दिन पूरी रात सामूहिक फाग मनाते है जिसमे फाग गाकर नृत्य भजन आदि चलते है। यह परंपरा पूर्वजो से चली आ रही है।

 

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