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विश्व जल दिवस आज,जल है तो कल है इसे रखें स्वच्छ

संजय जैन हटा

अब नदी का जल शु्द्ध बना रहे यह हो प्रयास
नदी सफाई की सार्थक पहल के १२ साल बाद आये अच्‍छे परिणाम
जन जन की आस्‍था से जुडी है सुनार नदी
विश्‍व जल दिवस पर नगर के आमजन से की चर्चा के अंश

 

दमोह/हटा- 22 मार्च को पूरा विश्‍व जल दिवस के रूप में मना रहा है, नगर का सौभाग्‍य है कि वर्तमान में नगर से निकलने वाली पवित्र सुनार नदी में पर्याप्‍त पानी है, ज्ञातव्‍य हो कि वर्ष २००७ में नगर के ८२ स्‍वयंसेवी संगठनों, राजनैतिक दल, धार्मिक संगठन, सामाजिक संगठन सहित नगर के आमजन ने एकजुट होकर सुनार नदी में जल बना रहे इसके लिए सफाई अभियान चलाया था साथ शासन प्रशासन से मांग की थी कि जिला से निकलने वाली नदियों पर श्रृंखलाबद्ध स्‍टापडेम बनाये जाये।
स्‍टापडेम के साथ सबसे बडी सौगात यह मिली की सक्‍सूमा वाटरफाल पर नदी के पानी को रोककर बिजली उत्‍पन की जा रही है, जिसके परिणामस्‍वरूप हमें बिजली के साथ अपार पानी भी मिल रहा है, नदी में करीब १५ किलोमीटर तक पानी भरा हुआ। हाल की में तीन दिन में करीब ५ फुट जलस्‍तर बढा है सूत्र बताते है कि सक्‍सूमा डेम की उंचाई ३ मीटर बढाई गई है जिससे और भी जलस्‍तर बढने की उम्‍मीद है ।
साहित्‍यकार एवं पूर्व कालेज प्राचार्य डा श्‍यामसुंदर दुबे ने बताया‍ आज जल दिवस है हम एक बहुमूल्‍य प्राकृतिक सम्‍पदा से बंचित होते जा रहे है हमारे आसपास के जलस्‍त्रोत सूख रहे है यह सूखना हमारी चेतना का सूखना है इसको प्राप्‍त करने के लिए लगातार संघर्ष की आवश्‍यकता है, व्‍यक्तिगत स्‍तर पर जल संरक्षण का सामूहिक लाभ लिया जा सकता है हमारी सुनार नदी जो विगत चार पांच दशकों से जल रहित हो रही थी वह अब जल अपूरित हो रही है यह लाभ अनवरत साधना से ही प्राप्‍त हुआ है नगर के जल संक्षरण कर्ता नवयुवकों ने इस हेतू सतत प्रयास किये है नदी का भर जाने का अर्थ है कि हमारे आसपास भी जल की समृद्धि हो रही है यह हमारे लिए प्रसन्‍नता का विषय है
गायत्री परिवार से जुडे एवं चिकित्‍सक डा सीएल नेमा ने बताया कि अब जल भरपूर है, इस जल को साफ शुद्ध रखना महत्‍वपूर्ण है इसके लिए आमजन को भी जागरूक होना आवश्‍यक है।
उमंग सेवा समिति एवं बीएसडब्‍लू गु्रप से जुडे सदस्‍यों ने कहा कि पानी के लिए आज किये गये प्रयास जरूरी नहीं कि तत्‍काल परिणाम दे लेकिन अगामी पीढी जरूर इस रूके हुए पानी का उपयोग करेगी। गांव के परम्‍परागत जलस्‍त्रोतों एवं छोटे छोटे नालों पर स्‍टापडेम बनाकर पानी को रोकने का बिना किसी सरकारी सहयोग के कार्य किया जा रहा है।

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