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देवताओं के लिए भी दुर्लभ है भागवत कथा – ललितांबा पीठाधीश्वर

सतना से रवि शंकर पाठक की रिपोर्ट

देवताओं के लिए भी दुर्लभ है भागवत कथा

ललितांबा पीठाधीश्वर

अमरपाटन। स्थानीय खमसेडा गांव में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान ललितांबा पीठाधीश्वर आचार्य श्री जय राम जी महाराज ने कहा कि देवताओं के लिए भी भगवान की कथा सत्संग यह सब दुर्लभ हैं जब मानव के कई जन्मों के पुण्य एकत्र होते हैं तब सत्संग हुआ भागवत कथा श्रवण करने का लाभ प्राप्त होता है
कथा व्यास आचार्य जी ने जगत की उत्पत्ति स्थिति विनाश के हेतु भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप का वर्णन करते हुए शौनक आदि 88 हजार ऋषियो द्वारा सूत जी महाराज के चरणों में किस प्रकार से जीवो के हृदयगत अंधकार को दूर किया जा सकता है इस प्रसंग को बताते हुए यह श्रीमद् भागवत कथा देवताओं को भी दुर्लभ है इस प्रसंग का विशद वर्णन किया आचार्य श्री कथा का वर्णन करते हुए बताया की श्री सुखदेव जी ने संसार भय को समाप्त करने के लिए कलिकाल में श्रीमद् भागवत संहिता को प्रकट किया जिसका आशय लेने मात्र से संसार भय समाप्त हो जाता है मन की शुद्धि के लिए इससे बड़ा बढ़कर कोई साधन नहीं है लेकिन जब जीव के जन्म जन्मांतर के पुण्य का उदय होता है तभी उसे श्रीमद् भागवत शास्त्र की प्राप्ति होती है क्योंकि परीक्षित को 7 दिन में मरने का श्राप लगा उस समय देवताओं को यह बात पता चली तब देवता अमृत कलश लेकर सुखदेव जी के पास आए सुखदेव जी से निवेदन किया कि यह अमृत परीक्षित को पिला दीजिए बदले में हमें कथा अमृत का पान करा दीजिए देवताओं की स्वार्थ पूर्ण बातों को सुनकर के सुखदेव जी ने कहा जिस प्रकार संसार में चमकने वाले कांच के टुकड़े से मणि की कोई तुलना नहीं होती उसी प्रकार श्रीमद् भागवत कथा रूपी अमृत से सामान्य अमृत की कोई तुलना नहीं हो सकती यह कथा रूपी अमृत देवताओं के अमृत से अधिक मूल्यवान है इसका आचार्य जी ने विशद वर्णन करते हुए सप्ताह विधि तक की कथा श्रवण कराई ।
भागवत कथा का आयोजन जगन्नाथ तिवारी व प्रदीप मणि जी महाराज के तत्वाधान में किया गया है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन कथा श्रवण कर रहे हैं और संतों का दर्शन भी एक ही मंच पर मिल रहा है यह सौभाग्य की बात है

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