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पुराने चेहरों पर फिर लगाया दांवविंध्य हलचल सतना

रविशंकर पाठक सतना

पुराने चेहरों पर फिर लगाया दांव
विंध्य हलचल सतना

रविशंकर पाठक सतना
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए विंध्य क्षेत्र मे अपने पुराने सांसदों पर ही एक बार फिर दांव लगाया है। शनिवार को भाजपा आलाकमान ने कैंडिडेट की जो लिस्ट जारी की है उसमें मध्यप्रदेश के अंदर पुराने चेहरों पर भरोसा जताया गया है। यही कारण है कि संसदीय क्षेत्र में विरोध की हकीकत को भी आलाकमान ने सिरे से नजरअंदाज कर दिया है। मजेदार बात यह है कि विरोध करने वालों में भाजपा के विधायक सहित ढेरों वजनदार नेता है। विंध्य क्षेत्र में संघ की गोपनीय रिपोर्ट सामने आने के बाद कैंडिडेट बदले जाने की हवा काफी तेज गति से जरूर चली पर दिल्ली दरबार पहुंचते पहुंचते हवा की रफ्तार असरकारक नहीं रह गई। विंध्य क्षेत्र की राजनीति के केंद्र माने जाने वाले रीवा लोकसभा के लिए भाजपा ने वर्तमान सांसद जर्नादन मिश्रा पर ही भाजपा ने दांव लगाया है। इसी तरह सतना संसदीय सीट के लिए भाजपा ने लगातार चौथी बार सांसद गणेश सिंह पर भरोसा जताया है। पिछले तीन पंचवर्षीय से गणेश सिंह लगातार चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंच रहे हैं। वहीं सीधी जिले के मामले में भाजपा ने अपने दो विधायकों के सांसद को लेकर किए जा रहे विरोध को दरकिनार करते हुए रीती पाठक को चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा के इन तीनों कैंडिडेट का विरोध किसी से छिपा नहीं है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के विरोध को भी भाजपा आलाकमान ने अनदेखा कर दिया है। संभव है कि विरोध करने वाले जमीनी स्तर पर अपनी रंगत तरीकें से दिखाने का काम करें।

संघ की रिपोर्ट को किया गया नजरअंदाज
लोकसभा चुनाव को लेकर आर एस एस अपने लेबिल पर गोपनीय फीडबैक हासिल करता है। मध्यप्रदेश के एक दर्जन से अधिक वर्तमान सांसदों को लेकर चौकाने वाली रिपोर्ट भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को सौंपी गई थी। संघ ने अपनी रिपोर्ट में गणेश सिंह, जर्नादन मिश्रा और रीती पाठक को बदलने के लिए कहा था। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संघ की जमीनी हकीकत को अनदेखा करते हुए अपनी पसंद को वरियता दिन गई है। संघ ही वह मजबूत संगठन है जिससे भाजपा जैसे राजनैतिक दल का उदय हुआ है, इसके बावजूद लोकसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में संघ की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए मोदी और शाह की भाजपा ने पुराने घोडों पर ही दांव लगाना मुनासिब समझा है। निस्संदेह भाजपा आलाकमान को यह भरोसा है कि वह साल 2014 की तरह इस बार भी मोदी नाम की लहर के सहारे केंद्र की सत्ता तक पहुंच जाएगा। इसलिए टिकट के मामले में मध्यप्रदेश के अंदर की गोपनीय रिपोर्ट को तवज्जो नहीं दी गई है।

अब कांग्रेस विंध्य को लेकर करेगी खुलासा
टिकट वितरण के मामले में भाजपा ने कांग्रेस से बाजी मार ली है। पिछले कुछ दिनों से विंध्य की सीटों के मामले में कांग्रेस को लेकर कयासों का बाजार जरूर तेज चल रहा है। कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव में चुनौती बहुत है। मध्यप्रदेश में पूरे 15 साल बाद कांग्रेस अपनी सरकार बना पायी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर बराबर नजर बनाए हुए हैं। शनिवार को भाजपा ने जैसे ही मध्यप्रदेश और खासकर विंध्य क्षेत्र को लेकर अपनी सूची जारी की तभी कांग्रेस आलाकमान भी एक बार नये सिरे समीकरणों को लेकर मंथन करने में जुट गया है। जानकारों की माने तो अब जल्द ही कांग्रेस अपने कैंडिडेट की घोषणा करने वाली है। भाजपा ने सीधी और रीवा से पंडित वर्ग का उम्मीदवार घोषित कर कांग्रेस आलाकमान को थोडा जरूर असमंजस में डाल दिया है। कांग्रेस की बात करें तो जहां रीवा से पूर्व सांसद लेट सुंदरलाल तिवारी के पुत्र सिदार्थ तिवारी राज को सबसे वजनदार माना जा रहा है वहीं सीधी और सतना के मामले में बात पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल पर आकर अटकी हुई है। सतना मे उलटफेर करने के लिए आम जनता का झुकाव नजर आ रहा है। वहीं सीधी मे चौकाने वाले परिणाम देने के लिए अंदरूनी तौर पर नजरअंदाज किए गए भाजपाइयों का सहयोग जीत की मंजिल हासिल करने में बेहद मददगार साबित होगा।

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