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तापसी पन्नू ने क्यो कहा कि मुझे मारा-मारी वाला प्यार समझ नहीं आता, पढे पूरी खबर

तापसी पन्नू ने क्यो कहा कि मुझे मारा-मारी वाला प्यार समझ नहीं आता, पढे पूरी खबर

मुंबई। तापसी पन्नू स्टारर ‘थप्पड़’ 28 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी अमृता (तापसी पन्नू) की है, जो भरी पार्टी में पति के थप्पड़ मारने के बाद उससे तलाक चाहती है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में तापसी ने इस फिल्म के आइडिया को लेकर बात की। उनकी मानें तो किसी ने उन्हें यह फिल्म ऑफर नहीं की थी। बल्कि वे खुद इस मुद्दे पर लम्बे समय से फिल्म करना चाहती थीं। तापसी कहती हैं,

“मुझे इस मुद्दे पर फिल्म करनी थी। मैंने ‘मुल्क’ के प्रमोशन के दौरान सर (डायरेक्टर अनुभव सिन्हा) के सामने अपनी इच्छा जाहिर की थी। मैंने उनसे कहा था कि अगर कोई ऐसी फिल्म बना रहा हो तो वे मुझे जरूर बताएं। अगर आप बना सकते हैं तो बहुत सही होगा। सर ने मुझसे कहा था कि उनके दिमाग में स्टोरी का आइडिया है और जब वह पूरी तरह स्क्रिप्ट में बदल जाएगा तो वे मुझे भेज देंगे। ‘आर्टिकल 15’ पूरी होते ही उन्होंने मुझे थप्पड़ की स्क्रिप्ट दी।
मारा-मारी वाला प्यार मुझे समझ नहीं आता

तापसी कहती हैं,

प्यार में थप्पड़ मारने को लोग सामान्य मानते हैं। कहते हैं कि इसमें थोड़ी-बहुत मारा-मारी चलती रहती है। लेकिन मुझे ऐसा प्यार समझ नहीं आता। जो किसी को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचा सके, वह कैसा प्यार? आप किसी की बेइज्जती कर रहे हो, वह कैसा प्यार है? बिना सम्मान के कौन-सा प्यार होता है? मुझे नहीं समझ आता यह? तुम अपना पावर किसी के ऊपर इस्तेमाल कर रहे हो, फिर चाहे आदमी औरत के ऊपर और औरत आदमी के ऊपर करे। गलत है ये। इज्जत प्यार की नींव है और जब यह नहीं होती तो वह प्यार ज्यादा देर तक नहीं टिकता।

सबसे ज्यादा होने वाला क्राइम ‘थप्पड़’

तापसी की मानें तो ‘थप्पड़’ को क्राइम की नजर से नहीं देखा जाता। लेकिन अगर इसे उस तरह देखा जाए तो इसे लेकर दर्ज होने वाले केस किसी अन्य अपराध की तुलना में सबसे ज्यादा होंगे। हमने इसे सामान्य बना दिया, यह कहकर कि ठीक है चलता है, बर्दाश्त करना सीखो। यह प्यार का पेशन है। तापसी कहती हैं,

हम फिल्मों में देखते हैं। अपने घर के अंदर सुनते हैं। पड़ोसियों के यहां देखते हैं। आवाजें आ रही होती हैं उनके दरवाजों से। लेकिन हम सोचते हैं कि हम कौन होते है कुछ कहने वाले? हम क्यों बोलें। हम यह नहीं कहते कि उनके घर में घुसकर कहो कि यह सब बंद करो। लेकिन मर्द या औरत जो भी पिट रहा है, उसे कम से कम यह तो कह सकते हैं कि अगर उसे लग रहा है कि जो हो रहा है,वह असामान्य है तो वह सामान्य नहीं है। अगर 5 में से 3 औरतों के साथ यह सब हो रहा है तो यह सामान्य बात नहीं हो सकती।
हम बचपन से सीखते हैं यह सब

तापसी की मानें तो वे किसी को थप्पड़ नहीं मार सकतीं। क्योंकि उन्होंने बचपन में थप्पड़ नहीं खाए हैं। बकौल तापसी, “

मेरे मां-बाप ने मुझे नहीं मारा। इसलिए मुझे नहीं लगता कि यह नॉर्मल बात है। मुझे लगता है कि यह सब बचपन से आता है। मां-बाप या टीचर बच्चे को मारते हैं तो उसे लगता है कि वे उसके अच्छे के लिए मार रहे हैं, ताकि वह ठीक हो जाए। वह समझता है कि यह तो इतने क्लोज रिश्ते में चलता है। मां से ज्यादा प्यार कौन करेगा? बड़ा होकर बच्चा वही प्यार दिखाता है। अपनी पत्नी या अपने पति पर, जैसे भी रिश्ते में और बात सामान्य हो जाती है। थप्पड़ मारना सामान्य बात नहीं है। रिमोट कंट्रोल थोड़े ही है, कि दो थपकी मारी और ठीक हो गया। इंसान हैं। ऐसे नहीं चलता है।

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