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दुष्कर्म की घटनाओं से आक्रोश में है बॉलीवुड अभिनेत्रियां, पढ़े किसने क्या प्रतिक्रिया दी

मुंबई. देश में बेटियों के ख़िलाफ़ लगातार हो रहीं आपराधिक घटनाओं से बॉलीवुड एक्ट्रेस भी हिल गयी हैं। पहले हाथरस और फिर बलरामपुर। दरिंदों के दिल में जैसे डर नाम की कोई चीज़ ही नहीं बची है। निरंकुश, बेखौफ़ और अंजाम से बेपरवाह। तमाम बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने इस पर अपना रोष और आक्रोश व्यक्त किया है। अब माधुरी दीक्षित ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जल्द न्याय की उम्मीद जताई।

माधुरी दीक्षित ने लिखा- हाथरस और बलरामपुर की घटनाओं के बारे में सुनकर मेरे पास बोलने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं व्यथित परिवारों के लिए प्रार्थना करती हूं और उम्मीद करती हूं कि प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। त्वरित क़ानूनी कार्रवाई से दोषियों को दंड दिलाने की ज़रूरत है।

माधुरी ने आगे लिखा कि दुर्भाग्य से हमारे समाज में औरतें और बच्चे ऐसे गंभीर अपराधों के जल्दी शिकार बनते हैं। हमें प्रशासन के साथ आगे बढ़कर इस बारे में लोगों से बात करने की ज़रूरत है। यही समय है कि हम जो बोलते हैं, उस पर काम करें और कोशिश करें कि कोई और मां, बेटी या बहन ऐसे अपराध का शिकार ना बने।

अनुष्का शर्मा ने अपनी इंस्टा स्टोरी में लिखा- मुश्किल से कुछ वक़्त ही बीता था कि दुष्कर्म की दूसरी घटना हो गयी। आख़िर ये दरिंदे किस दुनिया के बारे में सोच रहे हैं कि वो छोटी ज़िंदगियों के साथ कुछ भी कर सकते हैं। यह सोच से भी परे है, इतना परेशान करने वाला। ऐसे लोगों के ज़ेहन में कोई डर बचा है? एक समाज होने के नाते हम उनके दिलों में डर कैसे पैदा करें और महिलाओं की रक्षा करें? अनुष्का ने बलरामपुर के दुष्कर्मियों के लिए कोई दया ना दिखाने की अपील की है। वहीं, आलिया भट्ट ने हाथरस की घटना का ज़िक्र करते हुए लिखा- उन्होंने उसकी ज़ुबान काट दी, मगर उसे चुप नहीं करवा सके। अब वो करोड़ों आवाज़ों में शामिल है।

बता दें, इससे पहले अभिनेत्री सेलिना जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाथरस और बलरामपुर की घटनाओं को लेकर गुज़ारिश की कि देश की बेटियों की सुरक्षा उनके हाथों में है। ऐसे मामलों के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनायी जाए, जो महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले जघन्य अपराधों से निपटने का काम करे। सेलिना ने लिखा कि उन्होंने पीएम के नेतृत्व पर भरोसा है।

अथिया शेट्टी ने लिखा- दुष्कर्म, हिंसा, हमला, हत्या। बहुत हो चुका। क्रूरता के शिकार। यही समय है, हम खड़े हों और समाज की मानसिकता को बदलने की कोशिश करें। मुझे यक़ीन है, प्रशासन न्याय करेगा।

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