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‘तांडव’ मेकर्स को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली राहत, मुंबई पहुंची यूपी पुलिस की टीम आज से शुरु करेगी जांच पड़ताल

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को तांडव के निर्देशक अली अब्बास जफर, आमेजन प्राइम इंडिया की प्रमुख अपर्णा पुरोहित, निर्माता हिमांशु मेहरा और लेखक गौरव सोलंकी को 3 हफ्ते की अंतरिम राहत दे दी. इन सभी के खिलाफ वेब सीरीज के माध्यम से लोगों की धार्मिक भावनाओं को कथित रूप से आहत करने के सिलसिले में लखनऊ में मामला दर्ज किया गया है.

जस्टिस पी. डी. नाइक ने चारों को गिरफ्तारी से तीन सप्ताह की राहत दी है. इससे सभी को यूपी के लखनऊ में संबंधित कोर्ट में जाने का मौका मिल जाएगा.

बुधवार को यूपी पुलिस की चार सदस्यीय टीम लखनऊ में दर्ज मामले की तहकीकात करने मुंबई पहुंची. आज से यूपी पुलिस जांच शुरु करेगी.

संभावना है कि यूपी पुलिस लखनऊ में दर्ज मामले के संबंध में वेब सीरीज के निर्माताओं और अभिनेताओं आदि का बयान दर्ज करेगी. चारों के खिलाफ सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के अलावा आईपीसी की धाारा 153ए (धर्म, नस्ल के आधार पर अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 (किसी भी समुदाय के धर्म का अपमान करने की मंशा से धार्मिक स्थल को क्षतिग्रस्त करना), 501(1)(बी) (तनाव पैदा करने की मंशा से सार्वजनिक तौर पर बदमाश करना) में मामला दर्ज किया गया है.

चारों ने बुधवार को कोर्ट में अर्जी दी थी. यूपी में ‘तांडव’ की टीम के खिलाफ लखनऊ, ग्रेटर नोएडा और शाहजहांपुर में कम से कम तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं.

बवाल के बाद मेकर्स ने मांगी थी माफी

‘तांडव’ के कास्ट और क्रू की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘वेब सीरीज तांडव पर दर्शकों की प्रतिक्रिया पर हम करीब से नजर रख रहे हैं और आज एक चर्चा के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हमें बताया कि उन्हें वेब सीरीज के विभिन्न पहलुओं को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें और अर्जियां मिली हैं जो इसकी सामग्री द्वारा लोगों की भावनाओं को आहत करने संबंधी गंभीर चिंताओं और आशंकाओं के बारे में हैं.’’

बयान में कहा गया, ‘‘तांडव काल्पनिक कहानी पर आधारित है और किसी भी गतिविधि, व्यक्ति या घटना से इसकी समानता होना विशुद्ध संयोग है. इसके निर्माताओं और कलाकारों का किसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, धर्म की भावनाओं या धार्मिक आस्थाओं को आहत करने या किसी संस्था, राजनीतिक दल अथवा व्यक्ति (जीवित या मृत) का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था.’’

इसमें कहा गया, ‘‘तांडव की पूरी यूनिट लोगों द्वारा जताई गयी चिंताओं पर संज्ञान लेती है और यदि इससे गैर-इरादतन तरीके से किसी व्यक्ति की भावनाओं को चोट पहुंची है तो हम बिना शर्त माफी मांगते हैं.’’

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