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पंजाब के इस रोड का नाम है सोनू सूद की मां के नाम पर, रात ढाई बजे पहुंचकर एक्टर ने बताई ये खास बात, पढ़े पूरी खबर

मुंबई. । अभिनेता सोनू सूद बॉलीवुड के ऐसे कलाकारों में से एक हैं जो फिल्मों के अलावा अपनी निजी जिंदगी के साथ परेशान, जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद करने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें गरीबों का मसीहा भी कहा जाता है। बहुत से लोग सोनू सूद से सोशल मीडिया के जरिए मदद मांगते रहते हैं जिनके लिए अभिनेता हमेशा तैयार रहते हैं। अब सोनू सूद खास वजह से चर्चा में हैं।

सोनू सूद ने अपनी मां प्रोफेसर सरोज सूद को याद किया है। साथ ही पंजाब के मोगा में बिताए अपने बचपन के खास पलों को भी याद किया है। सोनू सूद ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर अपना एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में वह रात के ढाई बजे उस रोड पर खड़े दिखाई दे रहे हैं जो उनकी मां के नाम पर है। सोनू सूद प्रोफेसर सरोज सूद रोड पर खड़े अपने माता-पिता के बारे में भी ढेर सारी बातें बताते नजर आ रहे हैं।

सोनू सूद वीडियो में कहते हैं, ‘यह मेरी जिंदगी की सबसे खास जगहों में से है। इस रोड का नाम मेरी मां के नाम पर है, प्रोफेसर सरोज सूद रोड। मेरी पूरी जिंदगी मैं इस रोड पर चला हूं। मेरा घर उस तरफ है और मैं हमेशा यहां से स्कूल जाता था। मेरे माता-पिता भी इसी रोड से जाया करते थे। वह इस रोड से कॉलेज जाया करती थीं। यह मेरी जिंदगी का खास पल है।’

अभिनेता वीडियो में आगे कहते हैं, ‘मुझे भरोसा है कि वह जहां भी होंगी उन्हें मुझ पर गर्व होगा। मेरे पिता को मुझ पर गर्व होगा। हर चीज के लिए बहुत शुक्रिया। रात के ढाई बजे हैं और मैं अपने घर जा रहा हूं, यह वही सड़क है जिससे पूरी जिंदगी स्कूल से वापस लौटकर मैं अपने घर गया हूं’। सोशल मीडिया पर सोनू सूद का यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

अभिनेता के कई फैंस और तमाम सोशल मीडिया यूजर्स उनके वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं। साथ ही कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। इस वीडियो के साथ सोनू सूद ने कैप्शन में ‘मां’ लिखा है। गौरतलब है कि सोनू सूद कोरोना काल के बाद पहली बार अपनी जन्मस्थली मोगा स्थित आवास में पहुंचे तो वहां भी वह मसीहा के रूप में नजर आए। वहीं उन्होंने लाचारी व आर्थिक मजबूरी में जीवन जी रहे आठ लोगों को ई रिक्शा देकर उनकी ङ्क्षजदगी में उम्मीद की नई रोशनी बिखेर दी। ठीक एक साल पहले सोनू सूद ने काफी दूर से किताब कापियों के भारी बस्ते को लेकर पैदल जाती लड़कियों व मजदूरों की हालत को देख उन्हें 50 साइकिलें प्रदान की थीं।

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